Wednesday, October 2, 2013

400 लाख करोड़ का सवाल है ...
"भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा" ये कहना है स्विस
बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत
का लगभग 400 लाख करोड़ रुपये (400 ,00 ,000 ,000 ,000) उनके स्विस बैंक
में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना
टैक्स के बनाया जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए
जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक
4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक
प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर
भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो
यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा
सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है
और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2010 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना
बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो
तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों
में हमारे भ्रस्टाचार ने 400 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1
लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 400 लाख करोड़ है. यानि हर
साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़  भारतीय मुद्रा
स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है.
भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना
पैसा हमारे भ्रष्ट  राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ
है.
हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण
अधिकार है. हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG
घोटाला२ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला आदर्श होउसिंग घोटाला ...कोयला घोटाला ....
और नाजाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........
आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत
इसे पढ़े ... और एक  आन्दोलन  बन जाये ...

सदियो की ठण्डी बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज् पहन इठलाती है।
दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,
सिहासन खाली करो की जनता आती है।
जनता? हां, मिट्टी की अबोध् मूर्ते वही,
जाडे पाले की कसक सदा सहने वाली,
जब् अन्ग अन्ग मे लगे सांप  हो चूस् रहे,
तब् भी न कभी मुह खोल दर्द कहने वाली।
लेकिन, होता भूडोल, बवंडर उठते है,
जनता जब् कोपाकुल् हो भृकुटी चढ़ाती है,
दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,
सिहासन खाली करो की जनता आती है।


हुन्कारो से महलो की नीव उखड जाती,

सांसो के बल से ताज हवा मे उडता है,

जनता की रोके राह समय मे ताब् कहां?

वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुडता है।

सबसे विराट जनतंत्र जगत का आ पहुंचा,

120  कोटि हित सिहासन तैयार करो,

अभिषेक आज राजा का नही, प्रजा का है,

120  कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।

आरती लिये तु किसे ढुढता है मूरख,

मन्दिरो, राजप्रासदो मे, तहखानो मे,

देवता कही सडको पर मिट्टी तोड रहे,

देवता मिलेंगे खेतो मे खलिहानो मे।

Tuesday, October 1, 2013

चाणक्य के 15 अमर वाक्य

चाणक्य के 15 अमर वाक्य ---------------
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1 दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग
करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी।
2 किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार
नहीं होना चाहिए। सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे
जाते हैं।
3 अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे
जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न दो पर दंश
दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते
रहना चाहिए।
4 हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, यह
कड़वा सच है।
5 कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने
आपसे पूछो ---मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ?
इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा?
6 भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये
इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत
इसका सामना करो।
7 दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और
महिला की सुन्दरता है।
8 काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो।
9 सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है
पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।"
10 ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है
अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ।
11 व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से
नहीं।
12 ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के
हैं उन्हें दोस्त न बनाओ,वह तुम्हारे कष्ट का कारण
बनेगे। समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं।
13 अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार
करो। छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन
और संस्कार दो। सोलह साल से उनके साथ मित्रवत
व्यवहार करो। आपकी संतति ही आपकी सबसे
अच्छी मित्र है।"
14 अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण
एक समान उपयोगी है।
15 शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। शिक्षित
व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। शिक्षा की शक्ति के
आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर हैं।
और भी बहुत कुछ